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सीढ़ी मुरली प्वॉइंट्स प्रूफ के साथ
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बाबा की बुद्धि में तो यह सीढ़ी का चित्र बहुत रहता है।... बच्चे जो विचार-सागर-मंथन कर ऐसे-2 चित्र बनाते हैं, तो बाबा भी उनको शुक्रिया करते हैं या तो ऐसे कहेंगे कि बाबा ने उस बच्चे को टच किया है।(मु.29.2.76 पृ.2 अंत 3 आदि) मुरली प्रूफ देखें
सीढ़ी का चित्र तुम्हारे लिए बहुत अच्छा है समझाने का, जिन्न की भी कहानी बताते हैं । यह सभी दृष्टांत आदि इस समय के ही हैं। तुम्हारे ऊपर ही बने हुए हैं।(मु.18.11.70 पृ.2 अंत) मुरली प्रूफ देखें
फॉरेनर्स इतना सीढ़ी से नहीं समझ सकते हैं। जितना चक्र और झाड़ से। (मु.14.3.68 पृ.1 मध्य) मुरली प्रूफ देखें
क्रिश्‍चियन और कृष्ण की रास मिलती है। (मु. 1.5.73 पृ.3 अंत) मुरली प्रूफ देखें
क्राइस्ट के कृष्ण के साथ भेंट करते हैं। बुद्ध की नहीं। (मु.6.8.73 पृ.1 मध्य) मुरली प्रूफ देखें
84 जन्म सिर्फ वही लेते हैं जिनका आदि से अंत तक पार्ट है। (मु.11.3.73 पृ.1 मध्यादि) मुरली प्रूफ देखें
हीरे जैसा जन्म सतयुग में नहीं कहेंगे। हीरे जैसा इस समय है; क्योंकि इस समय तुम ईश्‍वरीय संतान हो। (मु.26.10.72 पृ.1 अंत) मुरली प्रूफ देखें
आप सबका वायदा है कि हम बाप द्वारा 21 जन्मों के लिए जीवनमुक्त अवस्था का पद प्राप्त कर रहे हैं, करेंगे ही।... 21 जन्म में एक जन्म संगम का है। आपका वायदा 21 जन्मों का है, 20 जन्मों का नहीं है।(अ.वा.18.1.08 पृ.2 अंत) मुरली प्रूफ देखें
मनुष्य 21 जन्म कहते, गायन भी करते। अभी यह ईश्‍वरीय जन्म एक अलग अकेला है। 8 सतयुग, 12 त्रेता, 21 द्वापर, 42 कलियुग। यह एडॉप्टेड तुम्हारा ईश्‍वरीय जन्म सबसे ऊँच मिला है। तुम ब्राह्मणों का ही यह सौभाग्यशाली जन्म है। (मु.11.12.78 पृ.3 अंत) मुरली प्रूफ देखें
तुम जानते हो हम बेगर टू प्रिन्स बनेंगे।... इन पास कुछ भी नहीं है। बेगर अर्थात् जिनके पास कुछ भी न हो। (मु.30.5.68 पृ.1 मध्यांत) मुरली प्रूफ देखें
100 साल’(मु.3.11.76 पृ.3 मध्य) मुरली प्रूफ देखें
यह सीढ़ी तो बहुत अच्छी बननी है। इनमें बड़ा क्लीयर कर लिखना है। ऊपर में लिखना चाहिए- विनाश काले प्रीत बुद्धि विजयन्ति और नीचे जहाँ साधु-समाज आदि-2 हैं वहाँ लिखना चाहिए- विनाश काले विपरीत बुद्धि विनश्यन्ति। यह अक्षर ज़रूर डालना चाहिए। (मु.6.10.71 पृ.2 अंत) मुरली प्रूफ देखें
विनाश काले विपरीत बुद्धि क्यों कहते। क्योंकि प्रीति बिल्कुल नहीं है। और ही बेहद के बाप के दुश्मन बन पडे हैं। (मु.15.10.78 पृ.1 अंत) मुरली प्रूफ देखें
विनाश ज्वाला प्रज्वलित कब और कैसे हुई? कौन निमित्त बना? क्या शंकर निमित्त बना या यज्ञ रचने वाले बाप और ब्राह्मण बच्चे निमित्त बने? जबसे स्थापना के कार्य-अर्थ यज्ञ रचा तब से स्थापना के साथ-2 यज्ञकुंड से विनाश की ज्वाला भी प्रगट हुई। तो विनाश को प्रज्वलित करने वाले कौन हुए? बाप और आप साथ-2 है ना! तो जो प्रज्वलित करने वाले हैं तो उन्हों को सम्पन्न भी करना है, न कि शंकर को। (अ.वा.3.2.74 पृ.13 अंत) मुरली प्रूफ देखें
माताओं का सबसे बड़ा पेपर ही मोह का है। अगर माताएँ नष्टोमोहा हो गईं तो नम्बर आगे हो जाएँगी।(अ.वा.5.6.77 पृ.216 अंत) मुरली प्रूफ देखें
प्रजापिता ब्रह्मा द्वारा नई पुरुषोत्तम सृष्टि रची जाती है। पुरुषोत्तम तुमको वहाँ देखने में आवेंगे।(मु.1.10.75 पृ.1 मध्य) मुरली प्रूफ देखें
पुरुषोत्तम वर्ष, पुरुषोत्तम मास, पुरुषोत्तम दिन भी इस पुरुषोत्तम संगम पर ही होता है। पुरुषोत्तम बनने की पुरुषोत्तम घड़ी भी इस पुरुषोत्तम युग में है। यह बहुत छोटा लीप युग है। (मु.4.5.74 पृ.2 मध्य) मुरली प्रूफ देखें
इस समय जो कुछ भी प्रैक्टिकल में होता है उनके फिर भक्तिमार्ग में त्योहार मनाए जाते हैं। (मु. 26.8.69 पृ.1 अंत) मुरली प्रूफ देखें
वहाँ (त्रेतायुग में) राम को 4 भाई तो होते नहीं। वहाँ तो बच्चा भी एक होता है। 4 बच्चे तो होते नहीं। (मु.29.9.77 पृ.1 मध्य) मुरली प्रूफ देखें
भारतमाता (शिव) शक्ति अवतार अंत का यही नारा है। (अ.वा. 21.1.69 पृ.24 आदि) मुरली प्रूफ देखें
रुद्रमाला बाद होती है विष्णु की माला।.....यह रुद्रमाला फिर विष्णु की माला में पिरोनी है यानी विष्णु के राज्य में जाते हैं। (मु.20.2.72 पृ.3 आदि) मुरली प्रूफ देखें
जो बाहर वाले गृहस्थ व्यवहार में रहते हैं यहाँ वालों से बहुत तीखे चले जाते हैं। (मु.18.11.68 पृ.2 अंत) मुरली प्रूफ देखें
तुमको रुद्रमाला में पिरोना है।......यह है रुद्रमाला और ज्ञानी तू आत्माओं की माला। (मु.8.3.73 पृ.3 मध्य) मुरली प्रूफ देखें
तुम जान गए हो सबसे पार्ट अच्छा उनका है जो पहले शिव की रुद्रमाला में हैं। नाटक में जो बड़े अच्छे-2 एक्टर्स होते हैं, उनकी कितनी महिमा होती है। सिर्फ उनको देखने लिए लोग जाते हैं। (मु.20.2.71 पृ.1 मध्यादि) मुरली प्रूफ देखें
विजयमाला के मणके बनना बड़ी बात नहीं है; लेकिन बाप के सिमरने के मणके बनना यही खुशनसीबी है। (अ.वा.20.5.74 पृ.47 आदि) मुरली प्रूफ देखें
(संगमयुगी) राधे-कृष्ण तो प्रिंस-प्रिंसेज थे। दोनों अपनी-2 राजधानी में रहते थे। ज़रूर स्वयंवर होगा (जैसा कि सीढ़ी के चित्र में ऊपर विजयमाला लिये हुये राधा को कृष्ण के सामने दिखाया भी गया है)। राधे-कृष्ण का (अपना) राज्य तो है नहीं। सूर्यवंशी और चंद्रवंशी घराना है। चंद्रवंशी में तो सूर्यवंशी कृष्ण आ न सके (क्योंकि ऊँच कुल का है)। तो बड़ी मूँझ हो गई है। (मु.10.5.73 पृ.3 मध्यादि) मुरली प्रूफ देखें
कलियुग में भी जो रीति-रसम होते हैं वह सभी यहाँ संगम पर किस न किस रूप में होते हैं। (अ.वा.14.5.70 पृ.2 अंत) मुरली प्रूफ देखें
राधे, कृष्ण के महल में आती थी, फिर उनके साथ प्यार हो गया। ऐसे नहीं, राधे-कृष्ण एक ही बाप के बच्चे थे। नहीं, अलग-अलग थे। राधे आती थी, फिर स्वयंवर हुआ। राधे-कृष्ण कोई भाई-बहन नहीं थे, दोनों अलग-2 अपनी-2 राजधानी में थे। (मु.14.7.73 पृ.3 मध्य) मुरली प्रूफ देखें
ल.ना. और राधे-कृष्ण का क्या कनेक्शन है? वह राजकुमारी, वह राजकुमार, अलग-2 राज्य के हैं। ऐसे नहीं कि दोनों आपस में भाई-बहन थे। वह अलग अपनी राजधानी में थी, वह अलग अपनी राजधानी का राजकुमार था। उन्हों का स्वयंवर होता है तो ल.ना. बनते हैं। (मु.26.10.73 पृ.2 मध्य) मुरली प्रूफ देखें
राधे-कृष्ण ही फिर ल.ना. बने हैं; परंतु वह बच्चे किसके थे, यह किसको पता नहीं है। कृष्ण की महिमा की है, राधे की कहाँ है! दोनों अलग-2 गाँव के प्रिंस-प्रिंसेज़ थे। ..... बगीचे में घूमने-फिरने जाती थी। फिर ड्रामा अनुसार उन्हों की आपस में दिल लगती है और सगाई हो जाती है। राधे-कृष्ण ही स्वयंवर बाद ल.ना. बनते हैं। (मु.13.11.71 पृ.2 अंत) मुरली प्रूफ देखें
द्वापर में कृष्ण के साथ कंस, जरासिंधी आदि बैठ दिखाए हैं। वास्तव में इस समय सब हैं राक्षस सम्प्रदाय। (मु.10.10.73 पृ.3 मध्य) मुरली प्रूफ देखें
देवकी को आठवाँ नम्बर श्रीकृष्ण बच्चा पैदा हुआ। अब आठवाँ नम्बर कृष्ण जन्म लेगा कब?.....सतयुग में। ..... सतयुग में कृष्ण के माँ-बाप को 8 बच्चे तो होते नहीं।......फिर दिखलाते हैं उनका बाप उनको नदी से पार ले जाता था। (मु.18.8.72 पृ.2 मध्यादि, 3 अंत) मुरली प्रूफ देखें
(सीढ़ी में ऊपर) कृष्णपुरी और (नीचे) कंसपुरी। दिखलाते हैं कृष्ण को (विषय-वैतरणी नदी-यमुना के) उस पार ले गए। है इस संगम की बात। कृष्ण को उस पार नहीं ले गए। यह तो बेहद (ज्ञान) की बात है। अभी हम उस पार जा रहे हैं ना। (मु.17.11.72 पृ.3 आदि) मुरली प्रूफ देखें
उनको कहा जाता है गाँवरे का छोरा। तो ताज कहाँ से हो सकता ! गाँव का छोरा तो गरीब होगा ना। (मु.8.2.70 पृ.2 मध्य) मुरली प्रूफ देखें
बाबा बैठ ब्रह्मा द्वारा सभी वेदों, ग्रंथों का सार बताते हैं। (मु.31.7.73 पृ.2 अंत) मुरली प्रूफ देखें
मंसा में तूफान तो बहुत आवेगा; परन्तु कर्मेन्द्रियों से न करना है। कर्मेन्द्रियों से कर बैठे तो उन कर्मेन्द्रियों को काटा जावेगा। वह अंग काटा जावेगा। अगर दान देकर फिर किस पर क्रोध किया तो वहाँ जबान काटी जावेगी। धर्मराज बाबा घड़ी-2 इन्द्रियाँ कटवाते जावेंगे। (मु.14.4.73 पृ.2 मध्य) • मुरली प्रूफ देखें
योगबल से होती है स्थापना, बाहुबल से होता है विनाश। (मु.11.2.68 पृ.2 मध्यांत) मुरली प्रूफ देखें
अगर किस पर क्रोध करते होंगे तो डिस्ट्रक्टिव काम किया ना। ऐसे जो माँ-बाप की आबरू गंवाते होंगे उनको फिर क्या पद मिलेगा। (मु.2.1.73 पृ.4 अंत) • मुरली प्रूफ देखें
बाप कहते हैं मैं सदैव परमधाम का रहने वाला हूँ। यह पुरानी दुनियाँ में आकर तुमको वरसा देता हूँ; फिर भी तुम नाम बदनाम करते हो। तब गाया हुआ है कि - सद्गुरु का निन्दक सूर्यवंशी राज्य में ठौर न पा सके। (मु.13.11.72 पृ.3 मध्य) मुरली प्रूफ देखें
बाबा कहे यह काम न करो, मानेंगे नहीं। ज़रूर उल्टा काम करके दिखावेंगे। राजधानी स्थापन हो रही है, उसमें तो हर प्रकार की(के) चाहिए ना। (मु.10.12.68 पृ.3 मध्यांत) मुरली प्रूफ देखें
गाया भी जाता है सतयुग में सूर्यवंशी श्री लक्ष्मी-नारायण की डिनायस्टी थी। जैसे क्रिश्‍चियन घराने में एडवर्ड दी फर्स्ट, सेकेण्ड, थर्ड चलता है। वैसे वहाँ भी लक्ष्मी-नारायण दी फर्स्ट, सेकेण्ड, थर्ड ऐसे 8 डिनायस्टी चलती है। (मु.26.4.71 पृ.2 मध्य) मुरली प्रूफ देखें
कृष्ण की 8 डिनायस्टी चलती है। पहले कहेंगे प्रिंस ऑफ सतयुग। फिर बनता है किंग ऑफ सतयुग। 8 पीढ़ी उनकी पहले चलती है। उस समय तो दूसरे राजाएँ होते नहीं। (मु.6.9.81 पृ.2 अंत) मुरली प्रूफ देखें
लक्ष्मी-नारायण दी फर्स्ट, दी सेकण्ड, थर्ड । आठ बादशाही चलती है। बच्चे राज्य करते हैं। सीता-राम का भी ऐसे चलता है। (मु.31.7.73 पृ.2 मध्यांत) मुरली प्रूफ देखें
यह अभी जानते हैं हम सो ल.ना. बनते हैं, हम सो राम-सीता बनेंगे। (मु.25.5.72 पृ.3 मध्यांत) मुरली प्रूफ देखें
84 जन्मों की चढ़ती कला (रामराज्य) और उतरती कला (रावणराज्य) उन दोनों के संस्कार इस (संगम के) समय आत्मा में भरते हो। (अ.वा.30.5.73 पृ.78 आदि) मुरली प्रूफ देखें
वास्तव में गुरु तो एक ही होता है सद्गति के लिए। बाकी सभी हैं दुर्गति के लिए। (मु.11.3.69 पृ.1 मध्य) मुरली प्रूफ देखें
यह ढिंढोरा पिटवाते रहो- एक सद्गुरु निराकार द्वारा सद्गति, अनेक मनुष्य गुरुओं द्वारा दुर्गति। (मु.11.3.69 पृ.1 अंत) मुरली प्रूफ देखें
रावण जब (सत्ता में) आते हैं तो पहले-2 घर में ही लड़ाई शुरू होती है। जुदा-2 हो जाते हैं। आपस में ही लड़ मरते हैं। अपना-2 प्रॉविंस (ज़ोन) अलग कर देते हैं। (मु.8.8.68 पृ.3 मध्यांत) मुरली प्रूफ देखें
त्रेता और द्वापर के संगम पर रावण आते हैं जबकि देवी-देवताएँ वाममार्ग में गिरते हैं। (मु.10.10.68 पृ.1 अंत) मुरली प्रूफ देखें
देवी-देवताएँ वाममार्ग में आते हैं तो सोमनाथ का मंदिर बनाते हैं। (मु.19.8.73 पृ.1 मध्य) मुरली प्रूफ देखें
भक्तिमार्ग में सोमनाथ का मंदिर बनता है। सो भी कुछ समय बाद में बनता होगा, फिर पूजा शुरू होगी। (मु.24.8.73 पृ.2 मध्य) मुरली प्रूफ देखें
गुजरात में बापदादा ने सेन्टर खोला है। गुजरात ने नहीं खोला है। इसलिये न चाहते भी सहज ही सहयोग का फल निकलता ही रहेगा। आपको मेहनत नहीं करनी पड़ेगी। धरनी सहयोग के फल की है। (अ.वा.12.12.83 पृ.45 आदि) मुरली प्रूफ देखें
जो सम्पूर्ण निर्विकारी होकर जाते हैं उनके मंदिर बनाकर विकारी लोग उनकी जाकर पूजा करते हैं। (मु.16.10.73 पृ.1 आदि) मुरली प्रूफ देखें
पूजा भी पहले-2 तुमने शिव की की है। तब ही तो सोमनाथ का मंदिर बनाया है। (मु.11.2.68 पृ.3 मध्य) मुरली प्रूफ देखें
बाबा तो कहते छत जितनी बड़ी सीढ़ी बनाओ। ऐसे ट्रान्सलाइट हो जो क्लीयर दिखाई पड़े। तो मनुष्य देख वंडर खावें। (मु.11.2.68 पृ.3 अंत) मुरली प्रूफ देखें
बहुत चित्र होने से मनुष्यों का खयालात सारा चित्रों में ही चला जाता है। .....पहाका है न टू मैनी क्वीन्स....। (मु.23.2.69 पृ.2 अंत) मुरली प्रूफ देखें
चित्र आदि जो भी बनाये हैं बेसमझी के। (मु.13.3.71 पृ.2 मध्य) मुरली प्रूफ देखें
आसुरी मत पर अनेक ढेर के ढेर चित्र बने हैं। (मु.5.5.68 पृ.1 मध्य) मुरली प्रूफ देखें
प्रदर्शनी की राय बाबा ने थोड़े ही निकाली। यह रमेश बच्चे का इन्वेंशन है। ..... फिर बाबा भी पास करेंगे। (मु.13.6.72 पृ.2 अंत) मुरली प्रूफ देखें
ऐसे नहीं कि द्वापर से ही शास्त्र शुरू होते हैं। नहीं। बाद में बनते हैं। पहले तो चित्र बनते, फिर उनकी जीवन कहानी बनाते हैं। पहले चित्र बनावे, तब फिर शास्त्र बनावें। टाइम लगता है। दो/पाँच सौ वर्ष बाद में बैठ शास्त्र बनाए हैं। (मु.9.8.64 पृ.3 अंत) मुरली प्रूफ देखें
भक्तिमार्ग में पहले सर्वशास्त्रमयी शिरोमणी गीता ही बनती है। गीता के साथ फिर भागवद, महाभारत भी है। यह भक्ति भी बहुत समय के बाद शुरू होती है। आस्ते-2 मंदिर ठिकाने शास्त्र बनेंगे। 3/4 सौ वर्ष लग जाते हैं। (मु.2.9.72 पृ.1 मध्य) मुरली प्रूफ देखें
जीवन कहानी में ही नाम बदल लिया है। बाप के बदले बच्चे का नाम डाल दिया है। (मु.7.8.74 पृ.3 आदि) मुरली प्रूफ देखें
गीता में सिर्फ नाम बदल लिया है। संगम होने कारण यह भूल कर दी है। (मु.8.7.73 पृ.2 मध्य) मुरली प्रूफ देखें
भारत को पूरा कलंकित कर दिया है। ............ इतनी रानियाँ थीं, उनको भगाया, मक्खन चुराया, इतने बच्चे थे। वास्तव में यह सभी है प्रजापिता ब्रह्मा की कहानी। उसके बदली कृष्ण को रख दिया है। (मु.5.5.73 पृ.1 आदि,अंत) मुरली प्रूफ देखें
मटकी फोड़ी माखन खाया यह सब उसके लिए झूठ बोलते हैं। (मु.23.8.68 पृ.3 आदि) मुरली प्रूफ देखें
भक्तिमार्ग में आधा कल्प से लेकर किसम-किसम के शास्त्र पढ़ते आए हैं। तुम यह छोटी किताब आदि छपाते हो मनुष्यों को समझाने लिए। (मु.12.2.69 पृ.1 अंत) मुरली प्रूफ देखें
दिन-प्रतिदिन बड़े किताब बनाते जाते हैं। कितनी बायोग्राफी बनाते जाते हैं! (मु.24.5.64 पृ.1 मध्यांत) मुरली प्रूफ देखें
पूजा भी पहले शुरू होती है अव्यभिचारी। पहले शिव की ही पूजा करते हैं। उनके मंदिर बनाते हैं, फिर ल.ना. के बनावेंगे।... फिर राम-सीता के मंदिर बनाने लग पड़ेंगे। फिर कलियुग में देखो- गणेश, हनुमान, चण्डिका देवी आदि-2 का अनेकानेक देवियों आदि के चित्र बनाते रहते हैं। (मु.9.2.71 पृ.2 आदि) मुरली प्रूफ देखें
जो हर कर्म में कर्मयोगी बनता है, उसकी पूजा भी हर कर्म की होती है। (अ.वा.30.11.92 पृ.108 अंत) मुरली प्रूफ देखें
जो कर्म याद में रहकर करते हैं वह कर्म यादगार बन जाता है। (अ.वा. 30. 06. 73. पृ. 117 आदि) मुरली प्रूफ देखें
इस ब्रह्मा के पास तो कुछ भी नहीं है। .... इनका चित्र रखने की भी दरकार नहीं। (मु.27.2.70 पृ.2 आदि) मुरली प्रूफ देखें
भक्तिमार्ग में मनुष्यों की बुद्धि में अनेकों की याद आती है। शिव के (सच्चे-2) मंदिर (अर्थात् सेवाकेंद्रों और संगमयुगी भक्तों के घर-2) में जाओ तो वहाँ और भी ढेर चित्र रखे हुए होंगे। तो व्यभिचारी ठहरे ना। सभी के आगे सर झुकाते रहते हैं । (मम्मा-बाबा-दीदी-दादी आदि देहधारी) गुरुओं की भी मूर्ति बनाकर रखते हैं। (मु.29.2.68 पृ.2 मध्य) मुरली प्रूफ देखें
कनिष्ठ हैं दैत्य। कनिष्ठ मनुष्य बैठ उत्तम मनुष्यों की महिमा गाते हैं। मंदिर बनाकर ताज वालों को बिगर ताज वाले नमन करते हैं। सीढ़ी में शायद कुछ ऐसा है चित्र। (मु.7.3.74 पृ.2 आदि) मुरली प्रूफ देखें
दैवी गुणों वाले मनुष्य थे। अभी आसुरी गुणों वाले (असुर या जानवर) बनते हैं। और कोई फर्क नहीं है। पूँछ वाला वा सूँढ़ वाला मनुष्य होता नहीं है। देवताओं की सिर्फ यह (जानवरियत की) निशानियाँ हैं। (मु.15.12.68 पृ.2 अंत) मुरली प्रूफ देखें
पहले अव्यभिचारी भक्ति शुरू हुई। अभी कितनी व्यभिचारी भक्ति है। (जड़) शरीरों की भी पूजा करते। इनको भूत पूजा कहा जाता है। शरीर पांच भूतों का बना है। (मु.25.7.76 पृ.2 मध्य) मुरली प्रूफ देखें
तुम जानते हो जो हमको ऐसा बनाते हैं उनकी पूजा होगी। फिर हमारी भी पूजा होगी नम्बरवार। फिर गिरते-2 5 तत्वों की भी पूजा करने लग पड़ते हैं। शरीर 5 तत्वों का है। 5 तत्वों की पूजा करो या शरीर की करो बात एक ही हो जाती। (मु.9.1.69 पृ.2 मध्य) मुरली प्रूफ देखें
कई हट्टी-कट्टी ब्राह्मणियाँ कपड़े भी धुलवाती हैं। बर्तन भी साफ़ करवाती हैं। वास्तव में उनको सभी कुछ अपने हाथ से करना है। तबीयत की बात अलग है। यहाँ सभी सुख ले लेंगे तो वहाँ (अब आने वाले संगमयुगी 21वें हीरे तुल्य सर्वश्रेष्ठ जन्म में) सुख गँवा देंगे। यहाँ ही नवाब बन जाते हैं। (मु.26.10.76 पृ.3 अंत) मुरली प्रूफ देखें
सर्विस से यहाँ सुख लेंगे तो वहाँ का सुख कम हो जावेगा। (मु.16.1.67 पृ.3 आदि) मुरली प्रूफ देखें
कोई-2 हेड ब्राह्मणियाँ यहाँ ही बड़ा आराम से रहती हैं। दास-दासियाँ रखती हैं। बिस्तरा बनाओ, चाय ले आओ, यह करो। उनको बाबा देहअभिमानी समझते हैं। बाप कितना निरअहंकारी है। बच्चों को बड़ा म्यूजियम मिल जाता है तो बस हुकुम चलाने शुरू कर देते हैं। जैसे रानी होकर चलती हैं। (मु.12.11.68 पृ.2 अंत) मुरली प्रूफ देखें
ऐसी भी बहुत ब्रह्माकुमारियाँ हैं जो भक्तिमार्ग बैठ सिखलाती हैं। जैसे साधु-संत करते हैं। कृष्ण की मूर्ति रख उनको माथा टेका। ब्रह्माकुमारियों के आगे भी माथा टेका। कुछ न कुछ आमदनी मिली। बैठ कर खाते। कितनी सत्यानाश कर रही हैं। चढ़ने के बदली और ही गिरते हैं। (मु.11.4.72 पृ.2 अंत) मुरली प्रूफ देखें
बाप कहते हैं इस समय हरेक दुर्योधन और द्रौपदियाँ हैं। दुर्योधन, द्रौपदी को नंगन करते हैं। ....... द्रौपदियाँ तो वास्तव में सभी ठहरीं। कुमारी अथवा माता सभी द्रौपदियाँ हैं। कीचक तो ढेर हैं जो पिछाड़ी पड़ते हैं। ...... कीचक आदि की अभी की बात है। (मु.7.5.73 पृ.2 मध्य) मुरली प्रूफ देखें
द्रौपदी पुकारती है कि बाबा हमको नंगन होने से बचाओ। हम पवित्र बनकर कृष्णपुरी में जाने चाहती हैं। कन्याएँ भी पुकारती हैं- माँ-बाप हमको तंग करते हैं, मारते हैं कि विकारी बनना ही होगा। (मु.1.5.72 पृ.1 मध्य) मुरली प्रूफ देखें
द्रौपदी कोई एक थोड़े ही हैं। हजारों करोड़ों नंगन होती रहती हैं। सभी नहीं पुकारते हैं। जिनको बाप की डायरैक्शन मिलती है पावन बनने लिये उनको पतित होने तंग करते हैं तो पुकारती हैं। (मु.1.3.69 पृ.1आदि) मुरली प्रूफ देखें
तुम्हारे में भी (नं.वार) कोई तो बिल्कुल ही तुच्छ बुद्धि रह जाते हैं। तुम जानते हो कितने कपूत बच्चे हैं। ब्रह्माकुमार कहलाने वाले भी कपूत हैं। उनसे तो साधु लोग अच्छे हैं। पवित्र रहते हैं। समझू हैं। यहाँ तो ऐसे-ऐसे हैं जो पतित दुनियाँ वालों से भी बदतर हैं। (मु.1.10.73 पृ.3 अंत) मुरली प्रूफ देखें
कन्याएँ सर्विस पर जाती हैं तो कीचक (ब्रह्माकुमारी के) पिछाड़ी में पड़ते हैं। फिर लिखा है भीमसेन ने कीचकों को पकड़ा है। कीचक माना एकदम डर्टी ब्रूट्स, जो पिछाड़ी पड़ते हैं। कीचक आदि की अभी की बात है। इस समय सभी द्रौपदियाँ, कीचक, दुर्योधन हैं। आसुरी सम्प्रदाय हैं। इसकी बहुत सम्भाल करते रहना है। अगर बाप के पास आये फिर कीचक बने तो पिता (पता) नहीं धर्मराज बन क्या हाल करूँगा! (मु.7.5.73 पृ.2 मध्यांत) मुरली प्रूफ देखें
बाबा कहते हैं मैं एक-2 आत्मा को सकाश देता हूँ। सामने बैठ लाइट देते हैं। तुम तो ऐसे नहीं करेंगे। (मु.12.4.68 पृ.4 मध्य) मुरली प्रूफ देखें
पांडवों को गार्ड बनाकर शक्तियों की रखवाली के लिए निमित्त बनाया हुआ है। पांडवों को पीछे रहकर शक्तियों को आगे करना है। गाइड नहीं बनना है। गार्ड बनना है। जब पांडव गाइड बनते हैं तो गड़बड़ होती है। इसलिए पांडव सेना को गार्ड बनना है।(अ.वा.2.4.70 पृ.235 आदि) मुरली प्रूफ देखें
बाबा बहुत कड़े-2 अक्षर देते हैं। देवियों को भी कटारी, इतनी भुजाएँ क्यों देते हैं? जैसे रावण को भुजाएँ दी हैं वैसे देवियों को भी दी हैं। तुमको तो इतनी भुजाएँ हैं नहीं; परंतु रावण सम्प्रदाय है ना; इसलिए भुजाएँ भी दे दी हैं। रावण सम्प्रदायवासी ही उनकी पूजा करते हैं। देवियों की पूजा गोया रावण की पूजा। फिर इनसल्ट कितनी करते हैं। देवियों को सजाकर पूजा आदि कर फिर कहते हैं डूब जा। नहीं डूबती तो ऊपर चढ़कर भी डुबोते हैं। कितनी नॉनसेन्स बुद्धि, आसुरी बुद्धि है। (मु.7.4.68 पृ.2 आदि) मुरली प्रूफ देखें
गुड़ियों के खेल में इतने मस्त कि यदि कोई (बाप के) घर का सही रास्ता बतावे तो कोई सुनने के लिए तैयार नहीं। (अ.वा.19.10.75 पृ.201 आदि) मुरली प्रूफ देखें
धर्मसत्ता और राज्यसत्ता दो टुकड़ों में बट जाती है इसलिए द्वापर हो जाता है। (अ.वाणी 30.9.75 पृ.137 आदि) मुरली प्रूफ देखें
भारत तो है मोस्ट बेगर। भारत अब काँटों का जंगल है। काँटों की शैया पर दिखाते हैं न। भीख माँग रहे हैं। तो यह भी सबसे भीख माँगते रहते। भारत की दुर्दशा है न। भारत बिल्कुल सॉलवेंट था, अभी तो कंगाल है।(मु.2.11.73 पृ.3 अंत) मुरली प्रूफ देखें
पूज्य-पुजारी, पावन-पतित भारत ही बनता है। बाकी तो हैं बीच में। ..... गाते हैं पतित-पावन, तो ज़रूर पतित हैं ना। भारत पावन था, अब पतित है। (मु.7.9.73 पृ.3 मध्यादि) मुरली प्रूफ देखें
इस (कलियुगी शूटिंग के) समय वह (कृष्ण उ़र्फ ब्रह्मा) कहाँ होगा? ज़रूर बेगर (में प्रविष्ट) होगा। जैसे क्राइस्ट के लिए भी कई समझते हैं कि वह बेगर के रूप में है। (मु.21.9.74 पृ.2 मध्य) मुरली प्रूफ देखें