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सच्ची गीता पॉकेट मुरली प्वॉइंट्स प्रूफ के साथ
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ऊँच ते ऊँच बेहद के बाप की खुशखबरीइस्टर्न ज़ोन महान लक्की ज़ोन है। क्यों लक्की है? क्योंकि ब्रह्मा बाप की कर्म भूमि और प्रवेशता भूमि है। (अ.वा. 17.11.94 पृ.15 अंत) मुरली प्रूफ देखें
 अच्छा, स्थापना में दिल्ली का भी पार्ट है तो यू.पी. का भी विशेष पार्ट है। इसीलिए विशेष भाग्यवान आत्माएँ हैं। (अ.वा. 17.11.94 पृ.16 आदि) मुरली प्रूफ देखें
 बाबा चला गया यह कह अविनाशी (साकार) सम्बंधों को विनाशी क्यों बनाते हो? सिर्फ पार्ट (ब्रह्मा से शंकर) परिवर्तन हुआ है। जैसे आप लोग भी (स्थूल में) सेवा स्थान चेंज (change) करते हो ना। तो ब्रह्मा बाप ने भी (स्थूल में) सेवा स्थान चेंज किया है। रूप वही, सेवा वही है। हज़ार भुजा वाले ब्रह्मा के रूप का वर्तमान समय पार्ट (साकार) चल रहा है तब तो साकार सृष्टि में इस रूप का गायन और यादगार है। भुजाएँ बाप के बिना कर्तव्य नहीं कर सकतीं। भुजाएँ बाप को प्रत्यक्ष करा रही हैं। कराने वाला है तब तो कर रहे हैं। (अ.वा.18.1.78 पृ.35 आदि) मुरली प्रूफ देखें
 बाप भी साकार से आकारी बना, आकारी से फिर निराकारी और फिर साकारी बनेंगे। (अ.वा.15.9.74 पृ.131 मध्य) मुरली प्रूफ देखें
(i) गुलज़ार मोहिनी में शिव नहीं आते, सिर्फ ब्रह्मा आते हैं।पवित्र कन्या के तन में आवे; परन्तु कायदा नहीं है। बाप सो फिर कुमारी पर कैसे सवारी करेंगे? (मु.15.10.69 पृ.2 मध्य) मुरली प्रूफ देखें
 नम्बर वन (कामी) काँटे में मैं आकर उनको नम्बर वन फूल बनाता हूँ। (मु.26.2.74 पृ.2 अंत) मुरली प्रूफ देखें
 बाप ही समझाते हैं, जिसमें प्रवेश किया है वह भी सुनते हैं। (मु.7.02.68 पृ.1 आदि) मुरली प्रूफ देखें
 बाबा तो बड़ी सभाओं में नहीं बैठ समझावेंगे। (मु.4.9.73 पृ.2 मध्य) मुरली प्रूफ देखें
 मैं सूक्ष्मवतनवासी ब्रह्मा देवता में प्रवेश नहीं करता हूँ। (मु.4.11.72 पृ.1 मध्य) मुरली प्रूफ देखें
 ऐसे नहीं बाबा का आह्वान करते है । नहीं, बाबा का आह्वान तो कर ही नहीं सकते। बाबा को आपे ही आना है। (मु.12.4.76 पृ.1 आदि) मुरली प्रूफ देखें
 ड्रामा में जिसका पार्ट है उनमें ही प्रवेश करते हैं और उसका नाम ब्रह्मा रखते हैं। .... अगर वह दूसरे में आवें तो भी उनका नाम ब्रह्मा रखना पड़े। (मु.19.3.78 पृ.2 मध्यांत) मुरली प्रूफ देखें
 संदेशियों द्वारा थोड़े समय के लिए जो सर्विस करते हैं उनको मुरली नहीं कहा जाता है। उस मुरली में (परिवर्तन का) जादू नहीं है। बापदादा की मुरली में ही जादू है। इसलिए जो भी मुरलियाँ चल चुकी हैं वह सभी रिवाइज़ करनी हैं। (अ.वा.21.01.69 पृ.20 अंत) मुरली प्रूफ देखें
 मैं जब आता हूँ तो किसको भी पता नहीं पड़ता है; क्योंकि हैं गुप्त। तुम बच्चे भी हो गुप्त। .... प्रवेश कब किया, कब रथ में पधारा, मालूम नहीं पड़ता। (मु.26.1.68 पृ.1 आदि) मुरली प्रूफ देखें
(ii) अन्त तक साकार द्वारा सम्मुख पालना से ही सर्व प्राप्तियाँईश्वर तो है निराकार। उनके साथ लव तो साकार में चाहिए ना। निराकार को कैसे लव करेंगे? (मु.1.1.72 पृ.1 आदि) मुरली प्रूफ देखें
 शिव है निराकारी बाप। प्रजापिता ब्रह्मा है साकारी बाप। अभी तुम साकार द्वारा निराकार बाप से (स्वर्ग का) वर्सा ले रहे हो। (मु.15.1.67 पृ.3 अंत) मुरली प्रूफ देखें
 बेहद का बाप है निराकार। वह जब तक साकार में न आए, तब तक (स्वर्ग का) बाप का वर्सा कैसे मिले? तो (अभी भी) शिवबाबा प्रजापिता बह्मा द्वारा एडॉप्ट करते, (P.B.K. बनाते हैं। स्वर्ग का) वर्सा देते हैं। (मु.28.1.90 पृ.2 आदि) मुरली प्रूफ देखें
 प्रेरणा से अगर योग और ज्ञान सिखलाना होता फिर तो बाप कहते, मैं इस गन्दी दुनियाँ में आता क्यों? प्रेरणा, आशीर्वाद यह सब भक्तिमार्ग (देहधारी गुरूओं) के अक्षर हैं। (मु.8.8.76 पृ.3 अंत) मुरली प्रूफ देखें
 यह शिवरात्रि प्रत्यक्षता की शिवरात्रि करके मनाओ। सबका अटेंशन जाए (कि) यह कौन हैं और किसके प्रति सम्बंध जोड़ने वाले हैं, सब अनुभव करें कि जो आवश्यकता है वह यहाँ से ही मिल सकती है। सब सुखों के खान की चाबी यहाँ ही मिलेगी। (अ.वा.3.2.79 267 मध्य) मुरली प्रूफ देखें
 आप श्रेष्ठ आत्माएँ सम्मुख बाप की श्रीमत लेने वाली हो, प्रेरणा द्वारा व टचिंग द्वारा नहीं। मुखवंशावली हो डाइरैक्ट मुख द्वारा सुनते हो। (अ.वा.24.5.77 पृ.170 आदि) मुरली प्रूफ देखें
 ब्राह्मण बच्चों के साथ जो बाप का वायदा है कि साथ चलेंगे, साथ मरेंगे और साथ जियेंगे अर्थात् (जीवन में रहते) पार्ट समाप्त करेंगे। ..... वह आधे में (1969 में) छोड़ सकते हैं क्या? (राजधानी) स्थापना के कार्य में निमित्त बनी हुई नींव (फाउंडेशन) बीच से निकल सकती है क्या? (अ.वा.30.6.74 पृ.84 अंत) मुरली प्रूफ देखें
 यहाँ (संगम में) बाप कहते हैं, सदा मेरे से जिस भी रूप में चाहो उस रूप में खेल सकते हो। सखा बन करके खेल सकते हो, बन्धु बन खेल सकते हो, बच्चा बन करके भी खेल सकते हो, बच्चा बनाकर भी खेल सकते हो। ऐसा अविनाशी (चैतन्य) खिलौना तो कभी नहीं मिलेगा, जो ना टूटेगा, ना फूटेगा और खर्चा भी नहीं करना पड़ेगा। (इस केटेगिरी में ब्रह्मा वा गुलज़ार दादी नहीं आते) (अ.वा.7.1.80 पृ.182 अंत) मुरली प्रूफ देखें
 जब तक इनका यह शरीर है, तब तक नॉलेज देता रहूँगा। (ल.ना.) राजाई स्थापन हो जाएगी फिर विनाश शुरू होगा और मैं चला जाऊँगा। (मु.1.12.73 पृ.3 आदि) मुरली प्रूफ देखें
 इस संगमयुग में बाप आकर 50/60 वर्ष इनमें ( प्रजापिता+ब्रह्मा में) रह, इनको (नर से नारायण में) बदली करते हैं। (मु.26.11.72 पृ.3 आदि) मुरली प्रूफ देखें
 यह तो शिवबाबा का रथ है ना सारे वर्ल्ड को हेविन बनाने वाला। (कौन? शिवशंकर) (मु.11.1.75 पृ.3 मध्य) मुरली प्रूफ देखें
 साकारी सृष्टि पर इस (इन) साकारी नेत्रों द्वारा दोनों बाप (शिव+प्रजापिता=शंकर) को देखना, उनके साथ खाना-पीना, चलना-बोलना, सुनना हर चरित्र का अनुभव करना, विचित्र को चित्र (शंकर) में देखना यह श्रेष्ठ भाग्य ब्राह्मण जीवन का है। (इस भाग्य पर सिर्फ़ दीदी, दादी, दादाओं आदि बड़े-बड़े महारथियों की ही बपौती नहीं है। सब (ब्राह्मणों का अधिकार है) (अ.वा.3.5.84 पृ.287 अंत) मुरली प्रूफ देखें
 बाप आते हैं तो बड़े-बड़े लोग महामूर्ख ही बन जाते हैं। .... जो बाप को ही नहीं जान सकते तो महामूर्ख हुए ना। यह भी अपनी कल्प पहले की महामूर्खता की यादगार (संगम की शूटिंग में ही) मनाते हैं। सारा उल्टा कार्य करते हैं। बाप कहते मेरे को जानो, वह कहते हैं बाप (साकार में) है ही नहीं। तो उल्टे हुए ना। आप कहते हो, बाप आया है। वह कहते, हो ही नहीं सकता। .... ऐसे तो बहुत कुछ (सेवा का) विस्तार कर लिया है; लेकिन सार है, बाप और बच्चों के मंगल मिलन का यादगार। (अ.वा.21.3.81 पृ.79 अंत 80) मुरली प्रूफ देखें
 सम्मुख बाप और वर्से की प्राप्ति अभी है अथवा भविष्य में? श्रेष्ठ स्टेज अब है या भविष्य में? अभी श्रेष्ठ है ना। (अ.वा.12.1.77 पृ.12 मध्य) मुरली प्रूफ देखें
 सबसे बड़े ते बड़ा संगमयुग का फल है जो स्वयं बाप प्रत्यक्ष रूप में मिलता। परमात्मा भी साकार रूप में साकार मनुष्य रूप में मिलने आता। इस फल में और सब फल (प्राप्तियाँ) आ जाते। (अ.वा.31.5.77 पृ.202 मध्य) मुरली प्रूफ देखें
 यहाँ तुम सन्मुख सुनते हो। सन्मुख में अच्छा मज़ा है। इसलिए अब तो टेप भी निकली है। फिर (वैसे ही सम्मुख अनुभव के लिए) टेलीविजन भी निकलेंगे। (मु.6.8.64 पृ.3 मध्य) मुरली प्रूफ देखें
 एक दिन टेलीविजन भी निकलेगा; परंतु सभी तो देख नहीं सकेंगे। देखेंगे बाबा मुरली चला रहे हैं। आवाज़ भी सुनेंगे। (मु.23.8.73 पृ.3 आदि) मुरली प्रूफ देखें
 टेलीविजन भी निकलेगा, कहाँ भी बैठ देखते रहेंगे। यह ब्रह्मा है, इसमें शिवबाबा आए हैं, शिवबाबा मुरली चलाते हैं- आगे चल यह भी निकलेगा। (सन् 65 की मुरली) (मु.26.6.70 पृ.3 अंत) मुरली प्रूफ देखें
 सम्मुख सुनना है नं वन, टेप से सुनना है नं टू, मुरली से पढ़ना नं थ्री। (मु.27.1.73 पृ.3 अंत) मुरली प्रूफ देखें
 जैसे आदि में साकार की लीला देखी, ऐसे ही अन्त में भी होगी। ...... तो साकार रूप में आए हुए बच्चे बाप को देखेंगे और अनुभव ज़रूर करेंगे। (अ.वा.18.1.82 पृ.256 आदि) मुरली प्रूफ देखें
 जब फादर है तो ज़रूर फादर मिलना चाहिए। फादर सिर्फ कहे और कब मिले ही नहीं तो वह फादर हो कैसे सकता? सारी दुनियाँ की जो भी आत्माएँ (500 करोड़) हैं, सबसे मिलते हैं। सब बच्चों की जो भी मुराद है, आश है, वह पूर्ण करते हैं। (मु.8.7.74 पृ.1 मध्य) मुरली प्रूफ देखें
(iii) सन् 1969 से ही क्रमशः बापदादा का प्रैक्टिकल साकार पार्ट अभी भी चल रहा है।सिर्फ़ संदेश देना तो चींटी मार्ग की सर्विस है, यह विहंग मार्ग की सर्विस है। दुनियाँ के अंदर यह आवाज़ फैलाओ कि बापदादा अपने कर्तव्य को कैसे (प्रैक्टिकल) गुप्तवेश में कर रहे हैं। उन्हीं(उन्हों), को इस (साकार) स्नेह संबंध में लाओ। (अ.वा.28.11.69 पृ.150 मध्य) मुरली प्रूफ देखें
 व्यक्त (साकार) में भी अब भी सहारा है। जैसे (सन् 70 से) पहले भी निमित्त बना हुआ साकार तन (पहली मूर्ति ब्रह्मा) सहारा था, वैसे ही अब भी ड्रामा में निमित्त बने हुए (आकारी स्टेज धारी दूसरी मूर्ति शंकर) साकार में सहारा है। पहले भी निमित्त ही थे, अब भी निमित्त हैं। यह पूरा (एडवांस) परिवार का साकार सहारा बहुत श्रेष्ठ है। अव्यक्त (गुलज़ार दादी) में तो साथ है ही। ..... साकार से स्नेह अर्थात् सारे सिजरे से स्नेह। (एडवांस पार्टी में) साकार अकेला नहीं है। प्रजापिता ब्रह्मा (है) तो उनके साथ परिवार (भी) है। (अ.वा.18.1.70 पृ.166 अंत) मुरली प्रूफ देखें
 निराकार और साकार दोनों ही (संगम में) सदा साथ रहें, तो (भविष्य में) साथ होने से जो संकल्प करेंगे, वह पहले ज़रूर उनसे वेरीफाई करावेंगे। (अ.वा.14.6.72 पृ.306 अंत) मुरली प्रूफ देखें
 घबड़ाओ मत! बैक बोन बापदादा, सामना करने के लिए किसी भी व्यक्त तन द्वारा समय पर प्रत्यक्ष हो ही जावेंगे और अब भी हो रहे हैं। (अ.वा.16.1.75 पृ.2 आदि) मुरली प्रूफ देखें
 बाप सम्मुख आते और बच्चे अलमस्त होने के कारण देखते हुए भी नहीं देखते, सुनते हुए भी नहीं सुनते। ऐसे खेल अभी नहीं करना है। (अ.वा.6.9.75 पृ.96 अंत) मुरली प्रूफ देखें
 आज खास विदेशियों के लिए बापदादा को भी विदेशी बनना पड़ा है। ...... ऐसे होवनहार ग्रुप को देखने के लिए व साकार रूप में मिलने के लिए निराकार (शिव) और आकार (ब्रह्मा) को भी साकार (शंकर) रूप का आधार लेना पड़ा। (अ.वा.2.8.75 पृ73 अंत) मुरली प्रूफ देखें
 ब्रह्मा बाप (शंकर) साकार रूप से भी अव्यक्त रूप (स्टेज) में अभी दिन-रात सेवा में ज़्यादा सहयोगी बनने का पार्ट बजा रहे हैं। (अ.वा.7.10.75 पृ.159 आदि) मुरली प्रूफ देखें
 इस वर्ष में कोई नई बात ज़रूर होनी है। सन् 76 में जिसका (बाप की प्रत्यक्षता का) प्लैन बनाया है; लेकिन निमित्त बनना पड़ता है; परन्तु होना तो ड्रामानुसार है; लेकिन जो निमित्त बनता है उसका सारे ब्राह्मण कुल में नाम बाला होता है। यह भी प्राइज़ है। (यह प्राइज ली किसने?) (अ.वा.31.10.75 पृ.255 अंत) मुरली प्रूफ देखें
 संगमयुग पर तकदीर की रेखा परिवर्तन करने वाला बाप सम्मुख (साकार में) पार्ट बजा रहे हैं। (अ.वा.9.9.75 पृ.99 मध्य) मुरली प्रूफ देखें
 हज़ार भुजा वाले ब्रह्मा के (साकार) रूप का वर्तमान समय पार्ट चल रहा है तब तो साकार सृष्टि में इस रूप का गायन और यादगार है। भुजाएँ बाप के बिना कर्तव्य नहीं कर सकतीं। भुजाएँ बाप को प्रत्यक्ष करा रही हैं। कराने वाला है तब तो कर रहे हैं। (अ.वा.18.1.78 पृ.35 मध्य) मुरली प्रूफ देखें
(iii) सन् 1969 से ही क्रमशः बापदादा का प्रैक्टिकल साकार पार्ट अभी भी चल रहा है।विश्व की सर्व आत्माओं के अल्पकाल के सहारे सब समाप्त हो एक बाप का सहारा अनुभव होगा। .... सर्व अल्पकाल के साधना रूपी साधन समाप्त हो एक ही यथार्थ साधन राजयोग द्वारा हरेक के बीच बाप प्रत्यक्ष होगा। विश्व में विश्वपिता स्पष्ट दिखाई देगा। हर धर्म की आत्मा द्वारा एक ही बोल निकलेगा कि हमारा बाप हिन्दुओं वा मुसलमानों का नहीं, सबका बाप। (अ.वा.28.12.78 पृ.161 मध्य) मुरली प्रूफ देखें
(iii) सन् 1969 से ही क्रमशः बापदादा का प्रैक्टिकल साकार पार्ट अभी भी चल रहा है।लास्ट बॉम्ब अर्थात् परमात्म बॉम्ब है बाप की प्रत्यक्षता का। जो देखे, जो (बाप के डाइरैक्ट) संपर्क में आकर के सुने उन्हों द्वारा यह आवाज़ निकले कि बाप आ गये हैं। डाइरैक्ट ऑलमाईटी अथॉर्टी का कर्तव्य चल रहा है। ......... अंतिम पावरफुल बॉम्ब परमात्म प्रत्यक्षता, अब शुरू नहीं की है। ..... सिखाने वाला डाइरैक्ट ऑलमाइटी (अथॉरिटी) है। ज्ञानसूर्य साकार सृष्टि पर उदय हुआ है यह (बात) अभी गुप्त है। ...... इस अन्तिम बॉम्ब द्वारा ...... हरेक (ब्राह्मण) के बीच बाप प्रत्यक्ष होगा। (संगमयुगी) विश्व में विश्वपिता स्पष्ट दिखाई देगा। (अ.वा.28.12.78 पृ.159 आदि, 161मध्य) मुरली प्रूफ देखें
 साकार स्नेह के रिर्टन में साकार रूप (मौजूद) है। (अ.वा.18.1.79 पृ.229 अंत) मुरली प्रूफ देखें
 जैसे अव्यक्त ब्रह्मा बाप साकार रूप की पालना दे रहे हैं, साकार रूप की पालना का अनुभव करा रहे हैं। (कहाँ) वैसे आप व्यक्त में रहते अव्यक्त फरिश्ते रूप का अनुभव करो। (अ.वा.13.3.81 पृ.43 आदि) मुरली प्रूफ देखें
 विधाता द्वारा अविनाशी तकदीर की लकीर खिंचवा सकते हो; क्योंकि भाग्य विधाता दोनों बाप (शिव+प्रजापिता) इस समय बच्चों के लिए हाज़िर-नाज़िर (नज़र के सामने) हैं। (अ.वा.14.10.81 पृ.55 अंत) मुरली प्रूफ देखें
 संगम पर बापदादा सदा आपके साथ हैं; क्योंकि अभी ही बाप बच्चों के आगे हाज़िर-नाज़िर (नज़र के सामने) होते हैं। (अ.वा.10.1.82 पृ.232 अंत) मुरली प्रूफ देखें
 भारत में किस तरफ़ और कौन, आध्यात्मिक लाइट देने के निमित्त है, अभी यह स्पष्ट होना है। सभी के अन्दर अभी यह खोज है कि भारत में अनेक आध्यात्मिक आत्माएँ कहलाने वाली हैं, आखिर भी इनमें धर्मात्मा कौन और परमात्मा कौन है? यह तो नहीं है, यह तो नहीं है- इसी सोच में लगे हुए हैं। ‘यही है’, इसी फैसले पर अभी तक पहुँच नहीं पाये हैं। (अ.वा.28.12.82 पृ.15 अंत) मुरली प्रूफ देखें
 जैसे आदि में साकार की लीला देखी, ऐसे ही अन्त में भी होगी। सिर्फ़ अभी एडीशन शिवशक्ति स्वरूप का साक्षात्कार होगा। फिर भी साकार पिता तो ब्रह्मा है ना। तो साकार रूप में आये हुए बच्चे बाप को देखेंगे और अनुभव ज़रूर करेंगे। (अ.वा.18.1.82 पृ.256 आदि) मुरली प्रूफ देखें
 जैसे साकार में याद है ना, हर ग्रुप को विशेष स्नेह के स्वरूप से अपने हाथों से खिलाते थे और बहलाते थे। वही (साकार) स्नेह का संस्कार अब भी प्रैक्टिकल में चल रहा है। (अ.वा.6.1.83 पृ.32 मध्य) मुरली प्रूफ देखें
 सारी विश्व की आत्माओं को चाहे स्वप्न में, चाहे एक सेकेण्ड की झलक में, चाहे प्रत्यक्षता के चारों ओर के आवाज़ द्वारा यह जरूर साक्षात्कार होना है कि इस ड्रामा के हीरो पार्टधारी (ल.ना.) स्टेज पर प्रत्यक्ष हो गये, धरती के सितारे धरती पर प्रत्यक्ष हो गए। सब अपने अपने ईष्टदेव को प्राप्त कर बहुत खुश होंगे। सहारा मिलेगा। (अ.वा.20.2.86 पृ.200 मध्य) मुरली प्रूफ देखें
(A) शंकर जरूर हैः-शंकर द्वारा विनाश होना है। (साकार में रहते आकारी स्टेज बनाए) वह भी अपना कर्तव्य कर रहे हैं। ज़रूर शंकर भी है तब तो साक्षात्कार होता है। (मु.26.2.73 पृ.1 अंत) मुरली प्रूफ देखें
 शंकर का पार्ट प्रैक्टिकल तो बजना है। (अ.वा.9.10.71 पृ.194 अंत) मुरली प्रूफ देखें
 बाप ने समझाया है शंकर का इतना पार्ट नहीं है। वह नेक्स्ट टू शिव है। (योगबल से विश्व की बादशाही लेने वाला कर्मेन्द्रियों से प्रत्यक्ष पार्ट नहीं बजाता, यह मनसा श्रेष्ठ सेवा करता है।) (मु.8.3.76 पृ.2 मध्य) मुरली प्रूफ देखें
 गॉड इज़ वन, उनका बच्चा भी वन। कहा जाता है त्रिमूर्ति ब्रह्मा। देवी-देवताओं में बड़ा कौन? महादेव शंकर को कहते हैं। (मु.10.2.72 पृ.4 मध्य) मुरली प्रूफ देखें
 विष्णु को, शंकर को भी देह का अहंकार हो सकता है। (तो देहधारी है ना) (मु.7.4.72 पृ.1 मध्य) मुरली प्रूफ देखें
 कुमारका बताओ शिवबाबा को कितने बच्चे हैं? ........ मैं कहता हूँ शिवबाबा को दो बच्चे हैं; क्योंकि ब्रह्मा वह तो विष्णु बन जाते हैं। बाकी रहा शंकर तो दो हुए ना। तुम शंकर को क्यों छोड़ देती हो? (मु.14.5.72 पृ.2 अंत) मुरली प्रूफ देखें
 शंकर क्या करते हैं? उनका (विषपायी) पार्ट ऐसा वण्डरफुल है जो तुम विश्वास कर न सको। (मु.14.5.70 पृ.2 आदि) मुरली प्रूफ देखें
 बहुत मनुष्य पूछते हैं शंकर का क्या पार्ट है? प्रेरणा से कैसे विनाश कराते हैं? बोलो, यह तो (विषपायी) गाया हुआ है। चित्र भी हैं। तो इस (चित्र) पर समझाया जाता है। वास्तव में तुम्हारा कोई इन बातों से कनेक्शन है नहीं। (क्योंकि शंकर को फॉलो नहीं करना है।) (मु.23.3.78 पृ.3 आदि) मुरली प्रूफ देखें
 शंकर का वास्तव में इतना पार्ट है नहीं। विनाश तो होना ही है। बाप विनाश उनसे कराते हैं जिस पर कोई पाप न लगे। (ऐसी तीखी याद है) (मु.29.4.70 पृ.1 मध्य) मुरली प्रूफ देखें
(B) शंकर (के भाग्यशाली मुकर्रर रथ) में (त्रिमूर्ति) शिव प्रवेश करते हैं:-शंकर भी देवता है। उन्होंने फिर शिवशंकर इकट्ठा कर दिया है। अब बाप कहते हैं, हमने (शिव+ब्रह्मा ने) इसमें(इनमें) (प्रजापिता+ब्रह्मा में) प्रवेश किया है तो तुम कहते हो बापदादा। वह फिर कहते हैं शिव-शंकर। शंकर-शिव नहीं कहेंगे। (क्योंकि बड़ा है शिव) (मु.11.2.75, पृ.2 आदि) मुरली प्रूफ देखें
 शंकर न होता तो हमको (शिवबाबा को) (शिव+ब्रह्मा को) शंकर के साथ मिलाते भी नहीं। (शंकर का) चित्र बनाया है तो मुझे भी (त्रिनेत्री शिव और ज्ञान चन्द्रमा ब्रह्मा को) शंकर के साथ मिला दिया है। शिव-शंकर महादेव कह देते तो महादेव बड़ा हो जाता। (न मिलाते तो सिर्फ सामान्य देवता होता) (मु.26.6.70 पृ.2 अंत) मुरली प्रूफ देखें
 (अमरनाथ गुफ़ा) में तो शिव का चित्र दिखाते हैं। अच्छा, शिव किसमें बैठा? शिव और शंकर (बाहर में) दिखाते हैं। शिव ने शंकर में बैठ कथा सुनाई। ऐसे हिसाब हो जाता है। (मु.6.10.76 पृ.3 आदि) मुरली प्रूफ देखें
 शिव ने शंकर में प्रवेश किया तो शिव-शंकर को मिला देते हैं। (मु.16.2.73 पृ.2 मध्यांत) मुरली प्रूफ देखें
 यह (शंकर) तो शिवबाबा का रथ है ना सारे वर्ल्ड को हेविन बनाने वाला। (मु.11.1.75 पृ.3 मध्य) मुरली प्रूफ देखें
 शंकर से अगर पूछेंगे, पूछ नहीं सकते; परन्तु समझो (आकारी बन) करके सूक्ष्मवतन में पूछो तो कहेंगे यह सूक्ष्म शरीर हमारा है। शिवबाबा कहते हैं यह हमारा नहीं है, यह (रथ) हमने उधार लिया है। (ब्रह्मा से) (मु.16.4.71 पृ.1 आदि) मुरली प्रूफ देखें
 यह (शंकर) भाग्यशाली रथ है ना। यही फिर विश्व का मालिक (विश्वनाथ/विश्वपिता) बनते हैं तो भागीरथ ठहरा ना। सब बातों का अर्थ समझना चाहिए ना। (मु.26.9.70 पृ.1 मध्य) मुरली प्रूफ देखें
 कल्प-कल्प इस भाग्यशाली रथ में आते हैं। यह भी तुम जानते हो। यह वही (संगमयुगी एक ही रथ) है जिसको श्याम-सुंदर कहते हैं। (ऐसे नहीं यहाँ श्याम, सतयुग में सुन्दर, दो रथ का नाम श्याम- सुन्दर नहीं है।) (मु.25.5.70 पृ.3 मध्यांत) मुरली प्रूफ देखें
 सारी सृष्टि (500 करोड़) का कल्याण होता है। यह है भाग्यशाली रथ। इनसे कितनी (बेहद की) सर्विस होती है। (मु.17.2.75 पृ.3 अंत) मुरली प्रूफ देखें
 इनको भाग्यशाली रथ कहते हैं। जिसमें बाप बैठ तुम बच्चों को हीरे (हीरोपार्टधारी ल.ना.) जैसा बनाते हैं। (मु.11.6.69 पृ.4 मध्यादि) मुरली प्रूफ देखें
 ब्रह्मा तो ठहरा उनका भाग्यशाली रथ। रथ द्वारा ही बाप (स्वर्ग का) वर्सा देते हैं। ब्रह्मा वर्सा देने वाला नहीं है, वह तो लेने वाला है। (मु.16.1.75 पृ.1 आदि) मुरली प्रूफ देखें
 शिवबाबा को ही रुद्र कहा जाता है। रुद्र ज्ञान यज्ञ से विनाश ज्वाला निकली तो रुद्र भगवान हुआ ना। (मु.26.1.75 पृ.2 आदि) मुरली प्रूफ देखें
(C) त्रिमूर्ति चित्र में तीनों मूर्तियों के प्रैक्टिकल चरित्र की यादगार के यथार्थ ओरिजिनल चित्र बनाना चाहिएः-यह त्रिमूर्ति आदि के चित्र यथार्थ रीति हैं नहीं। (मु.30.1.68 पृ.1 अंत) मुरली प्रूफ देखें
 त्रिमूर्ति शिव के चित्र में सारी नॉलेज है, सिर्फ त्रिमूर्ति के चित्र में नॉलेज देने वाले शिव का (प्रैक्टिकल असली) चित्र है नहीं, नॉलेज लेने वाले (ब्रह्मा) का चित्र है। (मु.23.1.75 पृ.2 मध्यादि) मुरली प्रूफ देखें
 अभी शिवजयंती आती है। तुमको त्रिमूर्ति शिव का चित्र निकालना चाहिए। त्रिमूर्ति ब्र.वि.शं. का एक्युरेट क्यों न निकालें। (परन्तु पार्ट प्रत्यक्ष हो तब ना) (मु.19.1.75 पृ.3 मध्यादि) मुरली प्रूफ देखें
 तुम त्रिमूर्ति शिवजयंती अक्षर लिखते हो; परंतु इस समय (1976 से पहले) 3 मूर्तियाँ तो हैं नहीं। तुम कहेंगे शिवबाबा ब्रह्मा द्वारा सृष्टि रचते तो ब्रह्मा भी ज़रूर साकार में चाहिए ना। बाकी विष्णु और शंकर इस समय कहाँ हैं, जो तुम त्रिमूर्ति कहते हो। यह बहुत समझने की बातें हैं। (मु.18.2.76 पृ.1 अंत) मुरली प्रूफ देखें
 ब्रह्मा वा विष्णु वा शिव तो विनाश (का कठोर कार्य) नहीं करेंगे। शंकर द्वारा विनाश गाया हुआ है। इसलिए त्रिमूर्ति का चित्र है मुख्य। (मु.29.11.77 पृ.1 अंत) मुरली प्रूफ देखें
 भारत में त्रिमूर्ति का चित्र भी बनाते हैं; परंतु उससे शिव का चित्र गुम कर दिया है। जैसे मनुष्यों का सिर काटी जाती है, वैसे त्रिमूर्ति से शिव का (मननचिन्तन करने वाले शंकर रूपी) सिर काट दिया है। (मु.26.6.71 पृ.2 अंत) मुरली प्रूफ देखें
 त्रिमूर्ति भी दिखाते हैं, सिर्फ शिव को उड़ा दिया है। उनका विनाश कर दिया है। ठिक्कर-भित्तर (बुद्धियों) में ठोक उनका लाश गुम कर दिया है। (मु.10.9.73 पृ.1 मध्य) मुरली प्रूफ देखें
(D) विश्वनाथ शंकर की जन्मभूमि, कर्मभूमि की यादगारों रूपी, यूपी में फर्रूखाबाद की तरफ़ कपिल मुनि द्वारा बनाई गई शास्त्र प्रसिद्ध काम्पिल्य नगरी बनाम कम्पिल में बाप की प्रत्यक्षताः-(परमात्मा) बाप कहते हैं- मैं भी मगध (गंगा-यमुना का बीच का प्रदेश) देश में आता हूँ। (मु.17.8.71 पृ.2 अंत) मुरली प्रूफ देखें
 यू.पी. की विशेषता क्या है? (तारने वाले बाप की यादगार) तीर्थ भी बहुत हैं, (मथुरा, वृन्दावन, अयोध्या, बनारस आदि) नदियाँ भी बहुत हैं। जगद्गुरू भी वहाँ ही हैं। ..... हरि का द्वार यू.पी. का विशेष है तो हरि का द्वार अर्थात् हरि (कृष्ण) के पास जाने का द्वार। ... (पाण्डव सो) सेवाधारी पण्डे जो बाप से मिलन मनाने वाले हैं। बाप के समीप लाने वाले हैं। (अ.वा.17.4.84 पृ.249 अंत) मुरली प्रूफ देखें
 आप ऐसी यात्रा कराते, जो जन्म2 के लिए यात्रा करने से छूट जायेंगे और वह बार2 यात्रा करते रहेंगे। तो सदा के लिए मुक्ति और जीवनमुक्ति की मंजिल पर पहुँचाने वाले पण्डे हो। आधे पर छोड़ने वाले, भटकाने वाले नहीं हो। (अ.वा.15.4.81 पृ.162 आदि) मुरली प्रूफ देखें
 यू.पी. की पतित-पावनी मशहूर है, यानी यू.पी. को सेवा का स्थान दिखाया है। तो ऐसा कोई यू.पी. से निकलेगा ज़रूर। जो अनेकों की सेवा के निमित्त बने। (अ.वा.1.11.81 पृ.105 मध्य) मुरली प्रूफ देखें
 यू.पी. में भक्त आत्माएँ भी बहुत हैं। तो (यू.पी. के) मास्टर भगवान अब भक्तों की पुकार सुन और भी जल्दी2 भक्ति का फल उनको दो। दे रहे हैं। (यू.पी. में मा. भगवान कौन और कहाँ दे रहे हैं?) लेकिन और भी स्पीड को बढ़ाओ। ........ पाण्डव गवर्मेन्ट के नक्शे में सेवा की एरिया सबसे नं. वन करके दिखाओ। विशेष इस वर्ष में रहे हुए गुप्त (108) वारिसों को प्रत्यक्ष करो। (सन् 1976 से) अब तक जो किया है, वह बहुत अच्छा किया है, अभी और भी चारों ओर की आत्माएँ वन्स मोर करें। वाहवाह की ताली बजायें। ऐसा विशेष कार्य भी यू.पी. वाले करेंगे। (अ.वा.12.12.79 पृ.110 मध्य) मुरली प्रूफ देखें
(D) विश्वनाथ शंकर की जन्मभूमि, कर्मभूमि की यादगारों रूपी, यूपी में फर्रूखाबाद की तरफ़ कपिल मुनि द्वारा बनाई गई शास्त्र प्रसिद्ध काम्पिल्य नगरी बनाम कम्पिल में बाप की प्रत्यक्षताः-(यू.पी. की) भूमि की महिमा बहुत है। (राम) कृष्णलीला जन्म भूमि देखनी होगी तो भी यू.पी. में ही जायेंगे। तो यू.पी. वालों की विशेषता है। सदा पावन बन और पावन बनाने की विशेषता सम्पन्न है। जैसे बाप की महिमा है पतित-पावन ...... यू.पी. वालों की भी महिमा बाप समान है। ......... जैसे स्थूल नदी अपनी तरफ खींचती है ना। (बिना बुलाये) खींचकर यात्री जाते हैं। चाहे कितना भी कष्ट उठाना पडे़ फिर भी पावन होने का आकर्षण खींच लेता है। तो यह पावन बनाने के कार्य का यादगार यू.पी. में है। (अ.वा.5.10.87 पृ.71 मध्य) मुरली प्रूफ देखें
 बाबा है बेहद के सारी दुनिया का मालिक, सभी आत्माओं का बाप। बाप को मालिक कहा जाता है। फर्रुखाबाद तरफ (उस) मालिक को मानते हैं। घर का मालिक तो बाप ही होता है। (ब्राह्मण) बच्चों को बच्चे ही कहेंगे। जब वह भी बड़े होते हैं, (अलौकिक) बच्चे पैदा करते हैं तब फिर (विश्व के) मालिक बनते हैं। यह भी राज़ समझने की है। (मु.2.5.69 पृ.3 अंत) मुरली प्रूफ देखें
 जैसे फर्रुखाबाद में कहते हैं, हम उस मालिक को याद करते हैं; परंतु वास्तव में विश्व का वा सृष्टि का मालिक तो ल.ना. बनते हैं। निराकार शिवबाबा तो विश्व का मालिक बनते नहीं। तो उनसे पूछना पड़े कि वह मालिक निराकार है वा साकार है? निराकार तो साकार सृष्टि का मलिक हो न सके। (मु.14.1.73 पृ.2 अंत) मुरली प्रूफ देखें
 सभी बच्चों पर मालिक को ही तरस पड़ेगा। बहुत हैं जो सृष्टि के मालिक को मानते हैं; परंतु वह कौन है? उनसे क्या मिलता है? वह कुछ पता नहीं है। फर्रुखाबाद में सिर्फ मालिक को मानते हैं। समझते हैं वह मालिक ही हमारा सब कुछ है। (मु.22.2.78 पृ.1 आदि) मुरली प्रूफ देखें
(v) गाँवड़े का छोरा:-इतना ऊँच ते ऊँच बाप कैसे छी-2 गांव में आते हैं। (मु.6.7.84 पृ.2 मध्य, 31.7.68 पृ.3 मध्य) मुरली प्रूफ देखें
 ज्ञान सागर झोपड़ी में रहना पसंद करते हैं। (मु.16.9.73 पृ.1 मध्यादि) मुरली प्रूफ देखें
 बंदरों की महफिल में आता हूँ। मैं देवताओं की महफिल में कब आता ही नहीं हूँ। जहाँ माल मिलता, 36 प्रकार के भोजन मिल सकते, वहाँ मैं आता ही नहीं हूँ। जहाँ रोटी भी नहीं मिलती बच्चों को, उन्हों को आय गोद में लेकर बच्चा बनाय गोद में लेता हूँ। साहूकारों को गोद में नहीं लेता हूँ। (मु.15.8.76 पृ.3 मध्यादि) मुरली प्रूफ देखें
 बाप (कम्पिल वासी कपिल मुनि) बहुत मोहजीत है। कितने ढेर (60/65 हजार) बच्चे हैं, जो काम चिक्षा पर जल मरे हैं। परमपिता परमात्मा आते ही हैं शंकर (कपिल मुनि) द्वारा पुरानी दुनिया का विनाश कराने, फिर मोह कैसे होगा? (मु.1.5.71 पृ.1 मध्य) (शास्त्रों में दिखाया है, कम्पिल में पाण्डवों ने लम्बे समय तक गुप्त वास किया। कपिलमुनि मन्दिर वा आश्रम भी यहाँ है। लिखा है कि सभी ऋषि-मुनियों ने यहाँ तपस्या की है। जैनियों की यादगार दिलवाड़ा मंदिर भी हैं।) मुरली प्रूफ देखें
(vi) विचित्र विश्वविद्यालयअच्छे ते अच्छा करना और ऊँचे ते ऊँचा बनना यह तो जीवन का लक्ष्य होता ही है। (अ.वा.22.4.84 पृ.264 अंत) मुरली प्रूफ देखें
 यह वंडरफुल विश्वविद्यालय है। देखने में घर भी है; लेकिन बाप ही सत् शिक्षक है। घर भी है और विद्यालय भी है; इसलिए कई लोग समझ नहीं सकते हैं कि यह घर है या विद्यालय है; लेकिन घर भी है और विद्यालय भी है; क्योंकि जो सबसे श्रेष्ठ पाठ है, (सृष्टि के आदि-मध्य-अंत का ज्ञान और राजयोग) वह पढ़ाया जाता है। (और अपना 84 जन्म का पार्ट मालूम पड़ता है।)..... “यहाँ यह सब लक्ष्य (हम क्या बनने वाले हैं) पूरा हो ही जाता है। एक-एक चरित्रवान बन जाता है।” (ल.ना. समान चरित्र वाले।) (मास्टर बीज रूप बच्चे (आत्माएँ) यहाँ डाइरैक्ट बाप से पढ़कर रूद्र माला के मणके बनते हैं।) (अ.वा.22.4.84 पृ.265 आदि) मुरली प्रूफ देखें
(vii) बाबा के चलाये गये माहावाक्यों अर्थात् मुरलियों में मनमत पर एडीशन भी और कटिंग भी हो रही है।गीताएँ, ग्रंथ आदि जो बनाते हैं तो उनमें कोई एडीशन वा काटकूट नहीं करते हैं। वही सुनाते हैं। यहाँ एड भी किया जाता है। काटकूट भी किया जाता है। (मु.4.7.72 पृ.4 आदि) मुरली प्रूफ देखें
 बेहद का बाप है निराकार। वह जब तक साकार में न आए तब तक बाप का वरसा कैसे मिले? तो शिवबाबा प्रजापिता ब्रह्मा द्वारा यह वरसा देते हैं। (मु.31.1.70 पृ.1 अंत) मुरली प्रूफ देखें
 निराकार बाप साकार बाप बिगर कोई भी कर्म नहीं कर सकते हैं। पार्ट बजा नहीं सकते हैं। (मु.5.2.76 पृ.1 आदि) मुरली प्रूफ देखें
 बाबा, हमें टूटी-फूटी रत्न भेज देते हैं। बहुत कट करते हैं। हमारे रतनों की चोरी हो जाती है। बाबा, हम अधिकारी हैं- जो रत्न मुख से निकलते हैं वह सभी हमारे पास आना चाहिए। यह कहेंगे वही जो रत्नों के शौकीन होंगे। अनन्य होंगे। (मु.10.3.72 पृ.2 अंत) मुरली प्रूफ देखें
 परमात्म मिलन मनाने के ठेकेदारों से अब थक गये हैं, निराश हो गये हैं। समझते हैं सत्य कुछ और है। सत्यता की मंजिल की खोज में हैं। (अ.वा.1.1.79 पृ.164 अंत) मुरली प्रूफ देखें
 बाप बैक बोन है, गुप्त रूप में पार्ट बजा रहे हैं, बाप को प्रत्यक्ष करना है। सुनाने वालों को पहचानते हैं; लेकिन बनाने वाला अभी भी गुप्त है। तो अब बनाने वाले को प्रत्यक्ष करना अर्थात् विजय का झंडा लहराना है। (अ.वा.5.2.79 पृ.273 मध्य) मुरली प्रूफ देखें
 हम इतनी श्रेष्ठ आत्माएँ हैं जो स्वयं परम आत्मा बाप, शिक्षक और सतगुरू बने हैं। इससे बड़ा भाग्य और किसी का हो सकता है? ऐसा भाग्य तो कभी सोचा भी नहीं होगा कि सर्वसम्बंधों से परम आत्मा मिल जायेगा। यह असम्भव बात भी सम्भव साकार में हो रही है। तो कितना भाग्य है! (अ.वा.3.12.79 पृ.81 आदि) मुरली प्रूफ देखें